“अर्रे मज़ा किसी के बाप का ग़ुलाम है का?”

आज सोनू भाई सिनेमा हाल से बाहर निकलते हुए खुश लग रहे थे। हमने भी पकड़ लिया उनको, “क्या सोनू भाई आप तो सिनेमा देखना छोड़ने वाले थे फिर आज इधर कहाँ?”

“भईया अभी मूड अच्छा है अभी सुन लीजिये सिनेमा के बारे में। नहीं तो हमको पता है की आधा घंटा बाद जब सोच के बोलेंगे तब उल्टा हो जाएगा। येही फोर्स 2 जिसको देख के हम खुश हैं घटिया हो जाएगा। भाई कोई कुछ भी कहे हमको मज़ा आया देखने में। भले ही जॉन अब्राहम को एक्टिंग करने नहीं आता हो, भले ही सोनाक्षी सिन्हा जितनी खराब दिखती है उससे भी खराब एक्टिंग करती हो, भले ही सिनेमा का विल्लन, जिसके बारे में खूब हल्ला हो रहा है की बहुत गज़ब है, एक मेंटली रीटारडेड बच्चा जैसा लगता हो, भले कहानी में दम न हो, भले 25गो अङ्ग्रेज़ी फिलिम का चोरी हो, भले पूरा फिलिम में बेवकूफी छोड़ के कुछ न दिखाया हो, हमको बहुत मज़ा आया। कुछ दिन से जो हेभी इंटेलेक्चूयल सिनेमा आ रहा है न जैसे नए जमाने के दार्शनिक कारण जौहर बनाते हैं, उससे बहुत बढ़िया है जाइए टिकिट ले लीजिये और मज़ा कीजिये 2 घंटा।“

हम तो कन्फ्युज हो गए। पूछना पड़ गया, “सोनू भाई सिरियस हैं की मज़ाक में फोर्स 2 का ले रहे हैं? तारीफ कर रहे हैं भाई की मज़ाक बना रहे? सच बताइये?”

सोनू भाई अब सिरियस हो गए, “एक महान महिला ने कुछ साल पहले अपने वजन के जितना ही वजनदार बात कहा था आपको याद हो तो- फिल्में तीन कारण से हिट होती हैं एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट और एंटेरटेनमेंट! का करिएगा दिमाग पर लोड लेके? थोड़ा छुट्टी दीजिये उसको, आपका अपना ही है। पड़ोसी से उधार थोड़े लाये हैं। देखिये आपको सच्चाई बताते हैं। कुछ नया नहीं मिलेगा आपको इस सिनेमा में बरसो पुराना कहानी है दोस्त के खून का बदला हीरो ले रहा है और बाप के खून का बदला विल्लन ले रहा है। दुन्नो गदहा है काहे की हमेशा के तरह असली बदमाश तो नेता है। हीरोइन मैडम शुरुआत तो ऐसे की हैं जैसे मिस्टर मिस्सस स्मिथ के अंजेलिना जोली वाला एक्शन दिखा के कहर ढा देंगी लेकिन निकलीं वही भारतीय महिला –गोली मत चलाओ, इसको मारो मत, इधर मत जाओ, उधर मत जाओ, ये मत करो वो मत करो, ऐसे नहीं वैसे होता है, और साथ में रोना गाना भी। अरे भाई आपको लिया कौन रॉ में? बाबूजी के सोर्स से रॉ में भी बहाली हो जाता है का? अपना सांड हीरो है, उसपे बाद में आएंगे। पहले सुनिए विल्लन का कहानी बाप जासूस रहता है और धरा जाता है तो सरकार पहचानने से इंकार कर देती है तो मर जाता है माँ भी गोली मार लेती है काहे की बाप को देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है और पैसा वैसा नहीं होता है उनके पास और फिर सीन काट दिया है की कैसे लौंडा अरबपति बन जाता है। भाई उसका अपना प्राइवेट सेना होता है एक से एक चीनी फाइटर रखे होता है दुनिया भर में इधर उधर करते रहता है। डेली का खर्चा उसका एक कारोड़ होगा। और भाई जानलेवा तो तब हो जाता है जब उ मूह से बाजा बजाता है। जुड़वा से मारा है ई स्टाइल उसमें भी मुकेश ऋषीया बांसुरी बजाता था और इस बालक से ज्यादा डेंजर लगता था। चलिये लेकिन जाने दीजिये इतना तो चलता है सिनेमा में।“

“आप सोनू भाई अभी बुराई ही कर रहे हैं। तो इतना सब होने के बाद बढ़िया कौन एंगल से है ये भी बता दीजिये।”

“एक से एक फाइट सीन है भाई मज़ा ला दिया है अपना सांड। खूब तोड़ फोड़ मचाया है। दौड़ा दौड़ा के मारा है सबको। नया स्टाइल में फाइट सीन सब दिखाया है न भाई। अरे उ कॉलेज का नया छोकरा सब नहीं खेलता है गोली चलाने वाला खेलवा कम्प्युटर पर, काउंटर स्ट्राइक, वैसे ही सीन सब है। मज़ा ला देता है। जॉन भाई को यही शोभा देता है बोलो कम, मार ज्यादा करो। और कसम से सिनेमा शुरू से अंत तक ऐसे स्पीड पर चलता है की जैसे गाड़ी का ब्रेक फ़ेल हो गया हो। अच्छा है की खराब है सोचने का टाइमे नहीं देगा आपको।“

“आपके कहने का मतलब है की एक बार देखा जा सकता है। मज़ा आएगा, क्यों?”

“अब वहाँ घुस के फ़िलॉसफ़ि खोजिएगा तो मत्ते जाइए। उससे बढ़िया बंगाली क्लब में चल जाइए। अरे आपको बताना भूल गए शुरुआत में जौनवा का दोस्त उसको एगो मैसेज भेजता है किताब में, हमको उ बुढ़वा याद आया अङ्ग्रेज़ी फिलिम वाला, अरे इनफरनो वाला, जो तीन फिलिम से दौड़ते रहता है पहेली सॉल्व करने के लिए। ऐसा बेवकूफी वाला मैसेज बना के भेजा था न की बुढ़वा देख लेता तो जौनवा के दोस्त को जिंदा कर के फिर थपड़ियाता तबीयत से। लेकिन ठीक है हिन्दी फिलिम से और क्या उम्मीद करिएगा। यही छोटा छोटा कष्ट है सिनेमा में बाकी कुल मिला के बहुत मस्त है।“

“कुल मिला के घंटा मस्त है!! एक अच्छा बात तो बताए नहीं, मज़ा कहाँ से आ गया आपको?”

हमारे इस सवाल पर सोनू भाई गंभीरता से बोले, “अर्रे मज़ा किसी के बाप का ग़ुलाम है का? जहां लीजिये वहीं आ जायेगा। जाइए कोशिश करिए, करने से सब होता है।

 

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