उड़ता पंजाब:”ना देखुंगा ना देखने दूंगा”

उड़ता पंजाब को निहलानी जी पिंजड़ा में डाल दिये हैं। क्या खबर है? कुछ आगे बढ़ा की नहीं बात? ई हो ससुर पगला गया है। क्या कहते हैं भईया?” सोनू भाई बिना मेरी तरफ देखे सवाल दाग दिये।

“हमको क्या कहना है भाई। नौटंकी कर रहे हैं निहलानी जी। कह रहे हैं पंजाब, लुधियाना, जालंधर सब निकाल दो फिल्म से। 90 कट करवा रहे हैं। पागलपन नहीं तो और क्या है। 90 कट के बाद बचेगा क्या?” मैंने भी अपने दो शब्द जोड़ दिये।

सोनू भाई हंस दिये, “हाहाहाहाहा!!! ऐसा लगेगा डाइरेक्टर लाइट, कैमरा आऊर कट बोला खाली, एक्शन बोलना भूला गया। हाहाहाहाहा!!!!! लेकिन भईया मैटर हँसने का नहीं है, गंभीर है। ऐसे कैसे काम चलेगा बताइये? अब उड़ता पंजाब तो हम देखे नहीं आऊर पता नहीं देख पाएंगे की नहीं मगर ई निहलानी जी को हम बहुत पहिले से जानते हैं। सेन्सर बोर्ड हाथ में आते उनका नौटंकी चालू करना वैसे ही है जैसे रॉबर्ट वाडरा जी को जमीन का मंत्री बना दिया जाये आऊर ऊ मंत्री बनते कानून पास कर दें की अब बेनामी क्या अपने नाम से भी जमीन खरीदना गैरकानूनी होगा। या कहिए की विजय माल्या जी को रिजर्व बैंक का गवर्नर बना दिया जाये आऊर ऊ कहें की आज से कोई भी आदमी बैंक से लोन नहीं ले सकेगा। हद होता है किसी भी चीज़ का भईया। लिमिट का भी एक सीमा होता है”।

udta punjab controversy

सोनू भाई गंभीर बातें कर रहे थे आज। थोड़ा सोचने के बाद वो फिर शुरू हुए, “भईया आप नहीं जानते होंगे निहलानी जी को ठीक से। हम इनको तब से जानते हैं जब ‘शोला और शबनम’ आया था। क्रांतिकारी आदमी थे अपने जमाने के। ऐसा गंदा, घटिया, अश्लील और फूहड़ फिलिम सब बनाना कोई मामूली बात नहीं है भाई। उसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए। साधारण आदमी के बस का बात नहीं है। गाना सुने हैं आप इनके फिलिम सब का। एक से एक सुपरहिट गाना है सब। आजकल तो रिमोट होता है की जैसे गाना आया चैनल बदल दिये। हम उस जमाने में झेले हैं इनको की इनका गाना बज गया घर में तो समझ नहीं आता था की कौन गड्ढा में घुसें। सब लोग इधर उधर देखने लगता था। सुने ही होंगे ‘खेत गएल बाबा बाजार गएल माँ, अकेले हैं घर मा तू आजा बालमा। वाह! क्या नायाब नमूना है कलाकारी का। आपको लग रहा होगा की हम इनको काहे गरिया रहे हैं जब आजकल भी सब येही गाली गलौज और अश्लील गाना वाला सिनेमा बन रहा है”। सोनू भाई सवाल किए और खुद ही जवाब भी देने लगे।

“देखिये हमको ना तब आपत्ति था इनके सिनेमा से ना आज है। जिसको देखना था देखा ही, खूब देखा तब्बे ना हिट हुआ सब। लेकिन आज जब कोई कुछ सोच के मेहनत से सिनेमा बना रहा है तब काहे उसके पिछवाड़े पर प्याज रख के काट रहे हैं? हम नहीं कह रहे की अनुराग कश्यप का फिलिम बहुत पारिवारिक होता है। लेकिन ई तो कोई भी सिनेमा देखने वाला बता देगा की निहलानी साहब के फूहड़ गाने में और कश्यप भाई के गाली गलौज में अंतर है। अब सिनेमा बनाने का तरीका बदला है तो बदला है। आँख बंद कर लेने से सच्चाई नहीं बादल जाएगा ना। असल में जानते हैं जब से सेन्सर बोर्ड इनके हाथ में आया है ना ई पहलाज निहलानी को लगता है की ऊ अपना पाप धो रहे हैं। इनको लग रहा है ई सब करने से इनका सब पाप माफ हो जाएगा”। आऊर एक बात बताएं आपको, मोदी जी को हम कुछ कहते नहीं, बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। भगवान करे अगले बार भी बनें पीएम। उनका ‘ना खाऊँगा ना खाने दूंगा’ का नारा तो बहुत सही था मगर उनके चेला लोग का ई ‘ना देखुंगा ना देखने दूंगा’ वाला काम सही नहीं है। समय रहते लगाम लगाना होगा उनको”।

मेरे चलने का वक़्त हो गया था तो मैं उठा उनकी बातों पर सोचते हुए, सोनू भाई रोक दिये, “अरे भईया जा रहे हैं का? ठीक है जाइए मगर निहलानी साहब का सबसे बेहतरीन गाना तो सुनते जाइए। माँ कसम तबीयत हरा हो जाएगा। ज्यादा खाये नहीं हैं ना? नहीं तो उल्टी भी हो सकता है। गाना का बोल है ‘मैं माल गाड़ी तू धक्का लगा’अंदाज़’ फिलिम से। फिर अपने फोन पर सोनू भाई ने ये गाना सुनाया। आप भी सुनिए………..

 

Comments