दिल में होली जल रही है- START THE CELEBRATIONS!!!!!

क्या आपको ऐसा नहीं लगता की होली का दिन अजीब होता है। आप उस दिन सड़क पर निकल जाइए आपको पता लगेगा। कोई अजनबी नहीं मिलेगा आपको। मैं इस बात की गैरंटी देता हूँ की कोई एक शख्श भी ऐसा नहीं मिलेगा जो आपकी तरफ देख कर मुस्कुराए न। अधिकतर लोग तो आपसे गले मिलेंगे और रंग लगाएंगे जैसे बचपन के दोस्त हों आपके। सब एक साथ हल्ला मचाते हुए पूरा शहर घूमते हैं। आपको एहसास ही नहीं होगा की कब आप उनके हिस्से बन गए। आप भले ही कितने शरमीले क्यों न हों आपके गले से अपने आप आवाज़ निकल जाएगी “होली है”। जादू सा असर करता है ये होली का त्योहार। आप कितने भी अकेले क्यों न हों कितनी भी कोशिश क्यों न कर लें दुखी रहने की मगर ये आपको दुखी रहने नहीं देगी शर्तिया।

हमारे फिल्मों में भी होली का एक विशेष स्थान है। कई सफल गाने फिल्माए गए हैं होली पर। या यूं कह लें की होली पर फिल्माए गए सभी गाने सफल ही रहे हैं। “रंग बरसे भीगे चुनार वाली” ये गीत तो सभी ने सुना होगा। हरिवंश राय बच्चन के बोलों पर संगीत दिया है शिव-हरी ने और अपनी आवाज़ दी है हमारे महानायक अमिताभ बच्चन ने। ये गाना, आज की तिथि में, सम्पूर्ण विश्व में होली का परिचायक बन गया है, अंग्रेज़ी में ANTHEM जिसे हम कहते हैं। बच्चन साहब का गाया हुआ एक और होली का गाना बहुत लोकप्रिय हुआ “होली खेले रघुबीरा अवध में होली खेले रघुबीरा”। बाग़बान फिल्म का ये गीत भी अमिताभ की आवाज़ में ही है। और कई गाने हैं होली के जो बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं और हर साल होली में तो कम से कम सुनने को मिल ही जाते हैं जैसे; शोले फिल्म का गीत “होली के दिन खिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं” या कटी पतंग का ये गीत “आज न छोड़ेंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली” इत्यादि।

मैं यहाँ आपका परिचय ऐसे होली के गीतों से कारऊंगा जो समान्यतया कम सुने जाते हैं। मैं ये नहीं कहता की ये गीत सफल नहीं है। हर गीत अपने आप में एक लोकप्रिय और सफल गीत है, एक नगीना है। किन्तु समय के साथ कुछ गीतों के सुर खो से गए हैं। यह मेरा एक प्रयास है उन गीतों के सुरों के उतार चढ़ाव को फिर से आपके मानस पटल पर लाने का। मैं आरंभ करता हूँ धनवान (1993) के इस गीत से और इन सब में अपना प्रिय गाना मैं सबसे अंत में लेकर आऊँगा।

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