बाग़ी – भ्रष्टाचार नहीं प्यार

आज मार्केट में निकले तो खबर मिली की सोनू भाई हमें तीन दिन से खोज रहे थे। अरे सोनू भाई अपने मोटरसाइकल मैकेनिक। हाँ, वही। तो भईया हमें आश्चर्य हुआ की क्या हो गया। हम पहुँच गए शाम को सोनू भाई की दुकान। हमने पूछा, “क्या हो गया सोनू भाई? काहे हमको खोज रहे हैं? कुछ विशेष?”

सोनू भाई तपाक से चढ़ बैठे, “का भईया केतना दिन से खोज रहे हैं आपको। बीच में केतना सिनेमा आया गया आप मिले ही नहीं। का कर रहे हैं आजकल? सिनेमा नहीं देख रहे का? आपको भी आजकल कोई और काम मिल गया है का?” सोनू भाई ने हमेशा की तरह फिर हमारा मज़ाक उड़ाया।

हमने कहा, “नहीं भाई काम क्या मिलेगा? बस ऐसे ही गर्मी बहुत है न तो घर से ज़रा कम निकलते हैं। आप बताइये क्या हाल है?”

सोनू भाई सीधे पॉइंट पे आ गए और कहा, “बाग़ी तो नहिएँ देखे होंगे। आप त आजकल खाली बंगाली के पीछे पड़े हैं। कोनो बंगाली मिल गयी है का? सच बताइये काहे एतना बंगाली फिलिम देख रहे हैं?”

हमने सोचा अब क्या सोनू भाई को सत्यजित राय की महिमा समझाएँ सो हमने टालते हुए कहा, “अरे सोनू भाई क्या मज़ाक करते हैं? बताइये कैसा लगा बाग़ी?”

बस सोनू भाई इसी का इंतज़ार कर रहे थे जैसे। तुरंत शुरू हो गए।

“भईया इतना साफ-सुथरा प्यारा सिनेमा बनाया है न की क्या बताएं। हमको तो पुराना ज़माना याद आ गया। हमलोग वाला, जब प्यार दूरे से होता था। आजकल वाला नहीं है की पहले सब करम कर लिए उसके बाद सोचना शुरू किए की ई प्यार था की कुछ और। एकदम लवली माइ डियर सिनेमा बनाया है। लड़की लड़का को देखा देखी वाला प्यार होता है। बहुत दिन के बाद ऐसा फिलिम बनाया है। बढ़िया बढ़िया गाना है। सब पुराना ज़माना का माने अपने जमाने का। वाह मज़ा आ गया। आजकल तो आप जानिए रहे हैं कैसे होता है प्यार सिनेमा में। प्यार नहीं भ्रष्टाचार होता है खाली। वही देख देख के आज कल का लौंडा सब सीधे लड़की को रूमे में ले जाने का तैयारी करता रहता है। अरे थोड़ा देखा देखी हो, थोड़ा बातचीत हो, थोड़ा झगड़ा हो, बारिश हो, गाना हो तब न प्यार का मज़ा है भाई।“

सोनू भाई कह तो सही रहे थे। हम भी हामी भर दिये की हाँ सोनू भाई सही बात है। सोनू भाई फिर शुरू हुए।

“भईया सिनेमा में जान लीजिये की कुछ भी नया नहीं है। सब एक दम पुराना स्टाइल। हीरो हीरोइन भी एक दम पुराना ज़माना का। टच भी मुश्किल से करता है एक दूसरे को। लेकिन सब बढ़िया है। थोड़ा सा दिक्कत है। जैकी का लौंडा अगर थोड़ा दाढ़ी बढ़ा के नहीं आता तो क्लियर नहीं होता की हीरोइन कौन है मानते हैं। लेकिन क्या बढ़िया काम किया है। आपसे पूछेंगे त आप येही कहेंगे न की ससुरे को डाइलॉग बोलने नहीं आता है। मानते हैं आपका बात भी, थोड़ा प्रोब्लेम है उसको लेकिन क्या बढ़िया काम किया है। कूदता ज्यादे है चलता कम है ई भी मान लेते हैं आपका बात लेकिन ईमानदारी से कह रहे हैं क्या बढ़िया काम किया है।“

हमने सोनू भाई को टोका, “हम कहाँ कुछ बोले भाई। सब अपने बोल रहे हैं आप। जब इतना प्रोब्लेम है उसके साथ तो बढ़िया काम क्या घंटा किया होगा। सब कष्ट उसका गिनवा दिये आप फिर भी कह रहे हैं क्या बढ़िया काम किया है। क्या बढ़िया काम किया है थोड़ा विस्तार से बताइये, हम कुछ नहीं कह रहे।“

सोनू भाई बात पकड़ लिए अब, “आप लोग न भईया खाली बुराई खोजते हैं सब में। सिनेमा देखते हैं बुराई खोजने के लिए। अरे थोड़ा एंजॉय करने के लिए देखिये। कम उम्र का है दोनों हीरो हीरोइन, थोड़ा भरोसा रखिए अपने कैसे थे कम उम्र में भूल गए का। दिन भर हमारे दुकान पर बैठे रहते थे की एक बार स्कूटी से लड़की निकाल जाये तो दिन बन जाये। भुला गए का?”

“सोनू भाई अब ज्यादा हो रहा है। ऐसा है की फालतू बात मत करिए सिनेमा कैसा था सो बताइये।“ हमें भी भाई गुस्सा आ गया।“

सोनू भाई समझ गए और बोले, “अरे बुरा काहे मान रहे हैं? हम सिनेमा ही बता रहे हैं। हमारे कहने का मतलब था की बिलकुल उसी जमाने का कहानी है सिनेमा में। आप देखिएगा न पुराना वाला फीलिंग आ जाएगा सच बता रहे हैं। लड़का लड़की ट्रेन में मिलता है तो बारिश होता है। फिर शहर में मिलता है फिर बारिश होता है। लड़की का बाप कमीना रहता है उसी का कमाई खाता है इसलिए चाहता नहीं की हीरो से उसका शादी हो और विलेनवा से शादी सेट कर देता है उसका। हीरो हीरोइन के बीच में गलतफहमी होता है। अब आप बताइये की आज का सिनेमा होता त का होता दिखाता की हीरो दूसरी लड़की के साथ और हीरोइन दूसरे लौंडे के साथ बिना टाइम वेस्ट किए। मगर इसमें हीरो अंगूठी तक नहीं उतरता जो लड़की उसको दी थी। फिर विलेनवा हीरोइन को उठा के ले जाता है। और भईया उसके बाद जो मार किया है जैकी का लौंडा देख के आपका मन खुश हो जाएगा। लड़के में दम है बाप जैसा नहीं है की खाली राम भईया बन के लखन लखन करत रहे। अरे एक एक को तोड़ तोड़ के मारा है। मज़ा ला दिया है छोकरा। शक्ति कपूरवा की बेटी कैसे ऐसी निकल गयी है भईया पता नहीं लगता। अरे बहुत सुंदर एक्टिंग की है।“

हमसे अब रहा न गया भाई। हमने टॉक दिया, “का सुंदर एक्टिंग की है? कुछ नया तो आप गिनाए नहीं। सुन के लग रहा है की साजन के जमाने का फिल्म देख के आए हैं आप। क्या है ये सोनू भाई? कैसे आपको अच्छा लग गया ये सब? सब तो पुराना बात है।“

सोनू भाई भड़क गए, “हाँ हम तो हैं ही पुराने जमाने के। जाइए आप देखिये नया ज़माना का सिनेमा। आपलोग को जब तक सिनेमा में सीन न दिखे न तब तक मन नहीं भरता। गंदगी भरा है आपके दिमाग में। बेचारा कोई साफ सुथरा मार धाड़ प्यार मोहब्बत वाला सिनेमा बनाया है तो उसको आप कैसे देखेंगे? जाइए देखिये अंग्रेज़ी और उसमें भी मज़ा न आए तो देखिये इटली और फ़्रांस।”

 

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