GHAYAL ONCE AGAIN : लिमिट का भी एक सीमा होता है!!!!

अरे भाई क्या बताएं कल शाम को बहुत मन से सोनू भाई के दुकान पे गए। अरे याद है ना, वही सोनू भाई गैरेज वाले। राजदूत के एक्सपर्ट। सोनू भाई सन्नी देओल के भगत। सुना है बार्डर जब आया था सोनू भाई रेकॉर्ड 35 बार थिएटर में देखे थे। और तो और हमारे मोहल्ले में ऐसा कहानी चलता है की गदर जब आया था तब सोनू भाई शुक्रवार सुबह को सिनेमा हॉल में घुसे थे और अगले मंगलवार को रात में निकले थे। हम एक दिन पूछे भी उनसे की 5 दिन क्या किए भाई सिनेमा हॉल में तो सोनू भाई अंदर की बात बताए की हर बार जब फिल्म खतम होने के बाद बाहर निकल रहे होते तो कोई कह देता की दरम्यान सिंहवा लास्ट में वापस आ गया था देखे की नहीं। सोनू भाई वापस घुस जाते कन्फ़र्म करने। 5 दिन बाद भी नहीं दिखा उनको तो बेचारे वापस आ गए।

एक बार सोनू भाई को कोई उनके दुकान पे धमका रहा था। हम वहीं थे। वो सोनू भाई से कहा,” तुम जानते नही हो हम कौन हैं?”
सोनू भाई सन्नी देओल स्टाइल में उंगली उठा के चिल्लाये “ओए तू वो ही है ना, ग़ुलाम दस्तगीर, लाहोर का मशहूर गुंडा।” borderसामने वाला बिना कुछ बोले सर खुजाता हुआ चला गया बेचारा। एक दिन तो भाई कमाल हो गया। हम सोनू भाई के घर के पास से गुजर रहे थे। सोनू भाई के चाचा भी बगल में ही रहते हैं उनके। तो हुआ यूं की उनकी चाची किसी बात पर सोनू भाई को गंदा गंदा गाली बके जा रही थी। अपने भाई बाउंडरी पर चढ़े हुए थे और ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहे थे, “बँटवारे के वक़्त 65 लाख रुपये दिये थे तब जाकर तुम्हारे सर पर तिरपाल आई थी। सर ढकने की औकात नहीं और गोलीबारी की बातें करते हैं आपलोग।”  हम भी हँसते हुए निकल लिए।

हाँ तो हम कहाँ थे? हाँ हम कल शाम को सोनू भाई के दुकान पे गए। सोनू भाई मूह लटका कर बैठे थे। जेनेरली ऐसे रहते नहीं हैं। किसी ना किसी से कुछ ना कुछ बकवास करते ही रहते हैं। हमने टोका भाई को, “क्या हुआ सोनू भईया आज काहे मूह लटका के बैठे हैं? आज तो त्योहार का दिन है, घायल वंस अगेन आया है भाई। देखे की नहीं? आप तो गए होंगे फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो?
सोनू भाई बहुत उदासी से जवाब दिये, “भईया कोई अपना पैसा लगा के अपने साथ अइसा कइसे कर सकता है? जानते हैं जाने के पहिले ही हमको शक हो रहा था। आप त दिल्ली में रहे हैं ना? ऊ कनाट प्लेसवा मे औरतिया सब छोटका तिरंगा झण्डा बेचती है देखे हैं? आदमी को पता होता है की हम ठगा रहे हैं फिर भी पैसा दे देता है। जैसा उस समय फील होता है ना, एकदम वइसे ही लग रहा था हमको टिकटवा लेते समय। सिनेमा शुरू होने के साथे सन्नी भाई चार- पाँच गो बचवन के साथ जो बचकाना हरकत किए हैं ना का बताएं हम आपको। लजवा दिये हैं भाई एकदम से। ई चाय वा वाला साला भी हंस रहा था। दाँत तूर देते इसका लेकिन का करें जब अपने सिक्का खोटा निकल जाए तो कोई का करे।

हमने कोशिश की उनको संभालने की। हमने कहा, “अरे सोनू भाई होता है यार सिनेमा अच्छा खराब होता रहता है।“

सोनू भाई और उखड़ गए।

“ना भईया अइसा कइसे। लव स्टोरी ऑफ आ स्पाइ बनाए हम कुछ नहीं कहे। सिंह साहब थे ग्रेट बनाए हम कुछ नहीं कहे। और पता नहीं का का किए हम कुछ नहीं कहे। लेकिन लिमिट का भी एक सीमा होता है। घायल के साथ अइसा नहीं करना चाहिए था। अरे परसो राते दारू पी के एगो सिपाही से चार डांटा खाये थे हम। उसको कह दिये थे की उतार दो ये वर्दी और पहन लो बलवंत राय का पट्टा अपने गले में। उ हो मारते मारते ई नहीं पूछ रहा था की बलवंत राय कौन है बे, ऊ भी जानता था। गरिया रहा था की सन्नी देओल समझता है रे अपने को। और सन्नी भाई किसी का खयाल नहीं किए। सब बर्बाद कर दिये। इतना त सन्नी लियोने भी नहीं लजवाती।“

सोनू भाई का दुख और गुस्सा वाजिब लग रहा था हमको भी। सोनू भाई भी मान नहीं रहे थे।

SUNNY“भईया ट्रेलर देखे थे ना तब लगा था की शायद इस बार ठीक हो सिनेमा। काहे कि सन्नी भाई हाफ़ जैकेट और उल्टा टोपी लगा के नाचते नहीं दिखे थे कहीं। लेकिन ना। अपना पईसा लगाए, अपने बनाए भी. सुने हैं कि अपने लिखे भी हैं। अब बताइये आप ही इनको लिखने कौन बोला। बाबूजी इनके कभी पढे लिखे नहीं आ ई चले कहानी लिखने। अरे कंट्रोल में रहना चाहिये ना भाई। लगता है कि बाप बेटा शाम को बोतल निकाले और खतम होते होते कहानी लिख दिये। और तो और ऊ सैफवा कि बहिन को पता नहीं कहाँ से खोज के ले आया है ससुर। इससे अच्छा तो मीनक्षी शेषाद्री ए को ले लेता। अभी भी इससे अच्छी दिखती है।”

“सन्नी देओल नहीं पीता भाई। शरीफ आदमी है। अरे होता है सोनू भाई दिल पर मत लो। सिनेमा है।“ हम फिर कोशिश किए संभालने कि।

सोनू भाई शांत होकर कहे, “सिनेमा खाली सिनेमा होता ना भईया हमलोग के लिए, त दू दिन के खाने का खर्चा हमलोग दू घंटा के सिनेमा पर नहीं बर्बाद कर के आते। गलत कहे हों तो कहिए।“

हम कुछ ना कह सके। सोनू भाई बहुत गहरी बात कह गए थे।

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