सरबजीत : इमोसन के साथ खिलवाड़!!

अपने मोटरसाइकल मैकेनिक सोनू भाई आज कुछ ज्यादा ही उदास दिख रहे थे। सोनू भाई? भूल गए आप उनको? अरे हाँ वही राजदूत एक्सपर्ट। अच्छा यहाँ पढ़िये याद आ जाएगा। हाँ तो हम कहाँ थे? हाँ सोनू भाई को उदास देख कर रहा नहीं गया। हमारे कदम अपने आप उनकी तरफ हो लिए और चाय पीने का मन भी हो चला था, सो हमने सोचा की सोनू भाई का हाल ही पूछ लेते हैं। चाय तो वो पीला ही देंगे।

“क्या सोनू भाई क्या हो गया? काहे मूंह लटकाए हैं। अंग्रेज़ी फिल्म देख लिए का कल? एक आया है न एक्स-मेन वाला?”

सोनू भाई दुख में ही धीरे से जवाब दिये, “काहे अंग्रेज़ी फिलिम देख के काहे मूंह लटकाएंगे? हमको अंग्रेज़ी नहीं बुझाता है का? मूंह लटका है हिन्दी फिलिम देख के। ऐसा इमोसनल कहानी पर ऐसे फिलिम बनाया जाता है? सच्चा कहानी भी देख के झूठा लगता है भैया। नाइंसाफी किया है ई लोग सरबजीत के साथ। सज़ा मिलेगा।“

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हमसे रहा न गया। हमने पूछा, “क्या हो गया भाई इतना काहे नाराज़ हैं आप? बताइये डिटेल में।“

सोनू भाई बहुत आहत थे। बोले, “भैया जाके देख के आइये आपको पता चल जाएगा हम काहे नाराज़ हैं। सिनेमा सरबजीत पर बनाया है की ऐश्वर्या जी पर आपको पता लग जाएगा। बेचारा रणदीप हुड्डा क्या गज़ब एक्टिंग किया है। लेकिन ई ऐश्वर्या जी सब बर्बाद कर देंगी। बस घर से उठ के चली आई हैं एक्टिंग करने। कपड़ा बदला है बस उनका और कुछ नहीं। हमको तो ई समझ में नहीं आ रहा की उनको लिया काहे सिनेमा में। कैसा डाइरेक्टर है? खाली नाम भँजाना चाहता था। सरबजीत का भी और ऐश्वर्या जी का भी। ऐश्वर्या जी का गलती नहीं है भैया। उनको तो एक्टिंग करना नहीं आता है सारा ज़माना जानता है, उनको लिया काहे ई डाइरेक्टर जब बुढ़िए का रोल देना था। एक दम खून खौल जाता है भैया देख के। आप जाइए देख के आइये। रिचा चड्ढा को काहे लिया है जब डाइलॉग बोलवाना ही नहीं था? सबको बर्बाद कर दिया है और साथ में सरबजीत के कहानी को भी। कोई दम नहीं भैया। किसी के जीवन पर, सच्चा कहानी पर ऐसे फिलिम बनाया जाता है आप ही बताइये। मज़ाक बना के रख दिया है। कुछ अता-पता नहीं किया ई सब सरबजीत के बारे में ऐसे ही अखबार पढ़ के ऐश्वर्या जी को बुला लिया और तैयार हो गया इनका फिलिम। बैन लगा देना चाहिए ऐसे फिलिम पर। बस खराब लग रहा है असली सरबजीत और रणदीप हुड्डा के लिए भैया। हुड्डा है बस जो सिरियस है सिनेमा में, बाकी सबको देख के लग रहा है की घूमने आया है। ऐश्वर्या जी का गलती नहीं है फिर कह रहे हैं हम। उनका गलती इतना है की अब उनको भी दुनिया की तरह जान लेना चाहिए की उनसे नहीं होगा एक्टिंग। बस बढ़िया दिखें यही बहुत है। अब हम और नहीं बोलेंगे हमारा मिजाज खराब है आज। आपको नहीं भरोसा है न तो जाइए देख के आइये। आपको एक जगह नहीं लगेगा की इस परिवार का बेटा 28 साल से पाकिस्तान के जेल में है और मरने वाला है। और मैडम को तो रहने ही दीजिये अब। कोई फाइदा नहीं”।

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सोनू भाई का दर्द हम समझ गए थे क्योंकि हम भी देख चुके थे सरबजीत। अपनी भाषा में उनका कहना एकदम सही था। बिना किसी रिसर्च के लेखक और निर्देशक ने ये फिल्म बना दी है बस ऐश्वर्या राय के स्टार पावर के भरोसे। ऐसे संवेदनशील विषय पर ऐसे फिल्म नहीं बनानी चाहिए थी। ऐश्वर्या राय ने होमवर्क तक नहीं किया है की उनको कैसे बोल्न और कैसे चलना चाहिए। पंजाबी तो ऐसे बोल रही हैं जैसे संता-बंता के चुट्कुले सुना रही हों। निर्देशक ओमङ्ग कुमार ने अपने मेरी कोम से कुछ सीखा नहीं और खो गए फिल्मी दुनिया की भीड़ में। हाँ बुरा लगता है सरबजीत और रणदीप हुड्डा के लिए। ये सच है।

सोनू भाई दुखी तो थे ही हमारे निकलते निकलते एक और डाइलॉग चिपका दिये। बोले, “भईया पिछला हफ्ता अजहर और इस हफ्ता सरबजीत, क्या हो रहा है हमारे इंडस्ट्री को? ईमानदारी नहीं रह गया है। सरबजीत ईमानदारी से बनाया गया सिनेमा नहीं है भाई”।

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