“हम क्यों शिकवा करें झूठा…… क्या हुआ जो दिल टूटा”

“ओ सोनू भाई, कहाँ भागे जा रहे हैं?” हमने भागते हुए सोनु भाई को देख कर आवाज़ लगाई।

सोनू भाई हमें देख कर वापस लौट आए। वापस आकार बोले, “भैया बैंक जा रहे थे। कल एक पुराना ग्राहक हज़ार का नोट दे गया। हम भी पुराना रिश्ता देख के रख लिए। अब बैंक दौड़ना पड़ रहा है उसी को बदलवाने के लिए।“

“एक नोट बदलने जा रहे? बाकी सब काला सफ़ेद कर लिए क्या?”

“भैया हम गरीब आदमी का काला सफ़ेद करेंगे। हमारे लिए तो सब काला है साइलेंसर से निकलता धुआँ जैसा। दिन भर जो कमाते हैं रात को चूल्हा में फूँक देते हैं।“

“आप तो सिरियस हो गए भाई। जाने दीजिये ये बताइये कैसा चल रहा है मोदी जी का अभियान?”

“हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का!!! कुछ दिन बाद बताएँगे आप भी जाने दीजिये।“

“अच्छा सोनु भाई सिनेमा देख रहे हैं की छोड़ दिये?”

इस सवाल पर सोनू भाई हंस दिये, “हहहहा!!!!!! सही पकड़े हैं। छोडने का ही सोच रहे हैं। जिस देश में ऐ दिल है मुश्किल 100 करोड़ कमा ले वहाँ लानत है सिनेमा देखने पर। शर्मिंदा फ़ील कर रहे हैं हम। दुनिया सुपर कूल हो गया है। महिला सशक्तिकरण का मतलब है पार्टी में किसी से मिलिये और उसके साथ ऊपर जाके शुरू हो जाइए। बन गयी आप सुपर कूल मॉडर्न लड़की। अब आप कहेंगे की लड़का को काहे हम नहीं कुछ बोल रहे शुरू तो वो भी हो गया था तो बता दें आपको की दुनिया में सबसे ज्यादा नफरत हम ऐसे लौंडो से करते हैं जो नाड़े के ढीले होते हैं। उससे हमको येही उम्मीद था इसी लिए कुछ नहीं बोले। अब आप ये भी कह सकते हैं की लड़की से उम्मीद रखना ही ज्यादती है उनपर तो सुन लीजिये भाई की हम थ्योरी में नहीं जीते। हम कोई बुद्धिजीवी नहीं हैं न शाम को चमकते गिलास में दारू पीते हुए इस ताक में रहते हैं की कौन औरत फ्री लग रही है। बहुत साधारण आदमी हैं हम।“

सोनुभाई के फ़्लो को रोकने के लिए हमें टोकना पड़ गया, “अरे अरे रुकिए सोनू भाई। आप तो रेल हो गए। लगता है बहुत गुस्से में हैं मज़ा नहीं आया ऐ दिल है मुश्किल देख के। अरे भाई लोग तो बहुत तारीफ कर रहा है। एक दम नया टाइप का सिनेमा बनाया है सुने हैं। आप काहे इतना नाराज़ हैं। क्या दिख गया आपको?”

“नया टाइप का तो है। जोहरवा पगला गया है ससुर, लंदफंद देवानन्द दिखाने लगा है। डाइलॉग सब सुनिएगा? ‘वो मेरी मोहब्बत है और मैं उसकी आदत’ ‘वो म्यूजिक पर फ़ना और मैं उसपर फ़िदा’। भईया लड़की मुस्लिम है तो हर लाइन में ‘कमबख़्त’ बोलेगी क्या? और डाइलॉग सुनिए ‘मैं गुलदस्ते का फूल नहीं रास्ते का काँटा बनना चाहती हूँ’। आपको लग रहा होगा ई सब डाइलॉग मज़ाक में बोला गया होगा लेकिन नहीं भाई। ई सब सिरियस डाइलॉग है। और सुनिएगा? सुनिए ‘शरम सेल्फ इम्पॉर्टेन्स की छोटी बहन होती है’। क्या बकवास है। लिखने वाला भी सोचा होगा की एकदम से अङ्ग्रेज़ी सिनेमा टाइप डीप मीनिंग वाला डाइलॉग लिख रहा है। कहीं मिलता तो बताते उसको की चरस पी के जर्मन सिनेमा देखने से आदमी जर्मन में सोचने लगता है फिर हिन्दी कहीं और घुस जाता है।“

“आप तो आग उगल रहे हैं सोनु भाई। ऐसा क्या हो गया करण जौहर से पर्सनल दुश्मनी है क्या आपको? अरे हल्का फुल्का सिनेमा है भाई वैसे ही देखना चाहिए।“

“हल्का फुल्का होता तो हल्के में ले लेते भईया। हल्का फुल्का वाला लूक नहीं है न। लूक तो ऐसे दे रहा है जैसे एकदम प्यासा का अगला पार्ट बना दिया है। या देवदास को नया जनम दे दिया है। कारण जौहर को सात जनम लगेगा मैटर को समझने में। कैसा कैसा कैरेक्टर है। लिजा हेडन को क्या दिखाया है? मज़ाक बनाया है महिलाओं का ।शर्मिंदा किया है भाई। हिंदुस्तान पाकिस्तान पर नहीं जा रहे हम लेकिन लड़का अच्छा एक्टिंग करता है। और बेचारा रणबीर सोचा होगा की फिर से रॉकस्टार बन जाएगा। लड़का बहुत टैलेंटेड है बस हर सिनेमा में मंदबुद्धि जैसा एक्टिंग करना बंद कर दे।“

“बंद करिए अब आप गरियाना। शिवाय तो बहुत बढ़िया लगा होगा आपको?”

“भईया अइसे ही सिनेमा देखना बंद करने का नहीं सोच रहे। शिवाय का बहुत बड़ा हाथ है उसमें। ससुर अजय देवगनवा जौहरवो से बड़का पगला है। का बनाया है क्यों बनाया है बस उसी को समझ आया होगा। खाली स्पेशल इफैक्ट वाला एक्शन से सिनेमा बढ़िया होता तो सुरेश ओबेरॉय के बेटवा का प्रिंस सुपरहिट होता। उसमें तो गाना सब भी हिट था। येही होता है जब कम दिमाग का स्टंटमैन अपने को होशियार समझने लगता है सिनेमा की जगह डबल्यूडबल्यूएफ़ बन जाता है। कुछ नहीं है सिनेमा में भईया। बहुत उम्मीद था उससे। सोचा होगा की एक सीन बरफ में चिल्लम खींचते डाल देंगे तो सब इंजीन्यरिंग कॉलेज के लौंडे पगला जाएँगे। लौंडे अपना अपना चिल्लम खींचे और निकल गए। देवगन भाई साहब धुआँ में हाथ मारते रह गए। इस सिनेमा के बारे में तो कुछ बताने को भी नहीं”

“काफी नाराज़ हैं आप सोनू भाई। पता नहीं सिनेमा पर गुस्सा है की मोदी जी पर। सच बताइये।“ हमने फिर कोशिश की पूछने की।“

“हम गरीब आदमी हैं भईया हमको तो नाराज़ होने का हक़ भी नहीं। सब खेलता है हमारे साथ सिनेमा हो या सरकार।“

सोनू भाई हमारा सवाल फिर टाल गए और जवाब में ये गाते हुए निकाल गए….

“हम क्यों शिकवा करें झूठा…… क्या हुआ जो दिल टूटा

शीशे का खिलौना था… कुछ न कुछ तो होना था……….. हुआ!”

 

Comments