हाऊसफ़ूल3- सिनेमा है की काँग्रेस पार्टी?

आज एक अजीब किस्सा हुआ। सोनू भाई की दुकान पर बैठा था मैं, चाय पी रहा था। सोनू भाई कुछ बोल नहीं रहे थे, अपना काम करने में व्यस्त थे। कोई बाबा आदम के जमाने की राजदूत पकड़ा कर गया था उन्हें उसी को बुलेट बनाने में लगे थे। तभी एक और आदमी आया बुलेट लेकर और सोनू भाई से पूछा, “भाई स्टार्ट होने में प्रोब्लेम कर रहा है, बन जाएगा?

सोनू भाई बोले, “बन जाएगा लेकिन एक हज़ार रुपया लगेगा”।

वो आदमी चौंक गया। पूछा, “क्यों भाई? इतना ज्यादा काहे?

सोनू भाई बिना सर उठाए अपना काम करते-करते बोले, “कल दो बार हाउसफुल3 का टिकिट लिए आप, पूरा मिला के एक हज़ार रुपया का, तब तो नहीं पूछे किसी से की काहे भाई, इतना ज्यादा काहे। 15 रुपया का मकई (popcorn) आप 150 रुपया में लिए, उ भी दो बार। उससे त नहीं पूछे आप की क्यों भाई, इतना ज्यादा काहे? हम मेहनत का पैसा मांग दिये तो ज्यादा लग गया आपको”। इतना कहते-कहते उन्होने उसकी बुलेट बना भी दी। शायद कुछ ज्यादा प्रोब्लेम थी नहीं। फिर भी चुप नहीं हुए और बोलते रहे, “जाइए हमको क्या पैसा दीजिएगा। एक शो और देख आइये”। वो आदमी भी शायद उनका परिचित था, उसने बुरा नहीं माना और चला गया।

अब बिना मेरे कुछ कहे सोनू भाई शुरू हो गए गुस्से में, “भईया आप सोच रहे होंगे हमको कैसे पता लगा की दो बार देखा है कल हाउसफुल3? असल में हम जब अंदर जा रहे थे तब ई बाहर आ रहा था और जब हम बाहर आ रहे थे तब ई फिर से अंदर जा रहा था। पहिले अपनी मेहरारू को ले जा रहा था बाद में किसी और की। और का होगा? ई सब सिनेमा देख के यही सब न करेगा लोग। “प्यार की माँ की आँख- प्यार की माँ की आँख” उसके बाद “सारी रात टांग उठा के” यही त गाना बना पाया है सब। नैतिक हरास (moral degradation) हो गया है समाज का”।

इतने पे मुझसे रहा नहीं गया, मैंने टोक दिया, “सोनू भाई, समाज सुधारने के लिए थोड़े ही बनाया है ये फिल्म। मनोरंजन है, वैसे ही लीजिये”। सोनू भाई और भड़क गए, “भईया हम भी कोई समाज-सुधारक नहीं हैं। हम भी मनोरंजन के लिए ही गए थे, और कुछ नहीं चाहिए था हमको। लेकिन मज़ा आया? नहीं आया। भगवान कसम अगर पूरा सिनेमा में एक बार भी हंसी आया हो तो आज से चाय पीना छोड़ देंगे”। फिर मूंह घूमा कर चिल्लाये, “छोटू, दो गो चाय ले आओ दौड़ के”। छोटू बगल की दुकान से चाय ले आया। पहली चुस्की लेने के बाद फिर शुरू हुए सोनू भाई, “भईया जानते हैं कल सिनेमा देखते हुए हमको एहसास हुआ की ई सिनेमा नहीं है। ई तो साला घोटाला है। ई काँग्रेस पार्टी है भईया विश्वास करिए। ई काँग्रेस पार्टी ही है”।

मेरे चेहरे पर अविश्वास देखते हुए सोनू भाई फिर शुरू हुए, “अच्छा हम अभी साबित कर देंगे। इसमें सोनिया गांधी कौन है? भाई साजिद नाडीयाडवाला। उसका बाप दादा सब प्रोड्यूसर था, खूब कमा के गया, पैसा और इज्जत दोनों। अब फसल ई काट रहा है। पैसा ई भी कमा रहा है मगर घोटाला कर के। घटिया फिलिम बना के। आप देख लीजिये इसका रेकॉर्ड। हाउसफुल सिरीज़ पूरा, फेंटम, किक, हीरोपनती, तेरी मेरी कहानी, अंजाना-अनजानी, कमबख़्त इश्क़, हे बेबी, जानेमन, मुझसे शादी करोगी, जुड़वा और भी बहुत है। घटिया फिलिम बना के पैसा यही कमाना शुरू किया है। यही साजिद खनवा को डाइरेक्टर बनाया। उ कितना बड़ा बड़ा घोटाला कर रहा है। अब ई मत पूछिएगा की राहुल गांधी कौन है इसमें? सारा हिंदुस्तान जानता है की सिनेमा इंडस्ट्री में एके गो राहुल गांधी है-अभिषेकवा। भाई किसी लायक नहीं है लेकिन छोड़ के जाएगा नहीं अंतिम सांस तक फाइट करेगा। उसके बारे में ज्यादा नहीं बोलेंगे हम भाभी बुरा मान जाएगी। हाउसफुल3 में ज्योतिरादित्य भी हैं ही- अपने स्वर्गीय मुख्य-मंत्री के लौंडे- रितेश देशमुख। अगर उस खानदान से नहीं आते तो इनको स्पॉट बॉय भी नहीं बनाता कोई कसम से। फिलिम में दिग्विजय सिंह जैसे लोग भी हैं जो अपने राजा हैं, कुछ नहीं बिगड़ता उनका ई सब काम करने से, लेकिन घटिया काम कर के हीरो लोग का जड़ काट देते हैं- जैसे बोमन ईरानी। उनका कुछ नहीं बिगड़ता ई सब घटिया काम कर के अपना पोजीसन सुरक्षित है उनका। अच्छा आप बताइये कौन सा पार्टी है जिसमें घोटालेबाज और असफल लोग का प्रमोसन किया जाता है। एकमात्र काँग्रेस पार्टी है न? वैसा ही हाउसफुल3 है। डाइरेक्टर फरहाद-साजिद को एंटरटेनमेंट बनाने के बाद दूसरा मौका कोई देता पूरे इंडस्ट्री में? लेकिन नहीं उनको न सिर्फ दूसरा फिलिम मिला बल्कि और बड़ा फिलिम देके उनका प्रमोसन भी कर दिया गया। अक्षय कुमार को कुछ नहीं बोलेंगे, मनमोहन सिंह है उ, उसका मजबूरी है ई सब काम करना। और तो और लोग को सब पता है की ई सब का चल रहा है लेकिन काँग्रेस को वोट फिर भी देते हैं की नहीं? वैसे ही सबको पता होता है की घटिया सिनेमा है फिर भी देखने जाते हैं। ई है देश की जनता। अब बताइये हाउसफुल3 काँग्रेस पार्टी हुआ की नहीं?”

सोनू भाई ने सोच में डाल दिया। मैंने कहा उनसे की हाँ भाई आपकी बात में दम है और सोचते हुए चलने को उठा तो सोनू भाई ने फिर अंत में गंभीर बात कह दी। वो बोले,

“और भईया ज्यादा उम्मीद मत लगाइएगा, राजनीति के जैसा ही यहाँ भी सब पार्टी एकके जैसा है। कोई अंतर नहीं है। कोई नया आम आदमी पार्टी भी आता है न तो उसका टार्गेट वही रहता है- पैसा, इसलिए शुरू में नयापन दिखाता है बस उसके बाद काँग्रेस के साथ गठबंधन हो जाता है। अनुराग कश्यप के बेस्ट फ्रेंड हैं करण जौहर और सुने हैं की इम्तियाज़ अली अब शाहरुख खान के साथ अगला बना रहे हैं। सोच लीजिये। जाइए करिये “प्यार की माँ की आँख- टांग उठा के”

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