STRESS THERAPY:TERA SURROOR

आज सोनू भाई से बच के भागने की बहुत कोशिश की भाई। अरे सोनू भाई वही मैकेनिक, गैरेज वाले। हाँ। (इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ CLICK करें )

लेकिन फिर भी बच नहीं पाये। हमें दूर से ही देख कर सोनू भाई चिल्ला पड़े,

 “अरे भईया कहाँ भाग रहे हैं? सुनिए तो।“

“नहीं सोनू भाई आज काम हैI” हमने रूखा सा जवाब दिया टालने के लिए।

“हहहहा लगता है मोदी जी अच्छा दिन ले आए हैं। आपके पास भी काम हो गया है आजकल। काहे झूठ बोल रहे हैं आइये कम से कम एक कप चाय पी के जाइए.” हमारा मज़ाक बनाते हुए सोनू भाई ने फिर से निमंत्रण दिया।

हम भी एक टूटी कुर्सी खोज कर सेट हो गए उसपर और शुरू हो गए, आगे की बात हमारी कुछ इस तरह चली:

ME : ठीक है भाई मज़ाक मत बनाओ हमारा, लाओ चाय पिलाओ।

SONU : कहाँ बीजी हैं भईया? मार्च के तेजी मंदी में खेल तो नहीं खेल रहे न आप।

ME : अरे हमारा क्या मार्च क्या मई? सब बराबर है भाई। तुम काहे इतना खुश हो, शादी पक्का हो गया का?

SONU : कहाँ भईया आप अब मेरा मज़ाक बनाने लगे। अरे हम आपको बुलाये थे दूसरा काम से। हिमेश भाई का सिनेमा आया देखे की नहीं?

ME : नहीं यार टाइम कम रहता है आजकल।

SONU : फिर वही बात. झूठ हमसे काहे बोल रहे हैं? कहिए पईसा कम रहता है आजकल।

ME : अरे जो समझना है समझो और बताओ कईसा सिनेमा था।

SONU : हा हा हा हा हा हह हा लेकिन ध्यान से सुनना पड़ेगा बीच में नहीं भागिएगा, काहे की हम सिनेमा के बीच में नहीं भागे थे।

(वो बोलते गए बिना रुके।)

जानते हैं डरते डरते गए थे सिनेमा देखने काहे की हमको याद है 6 साल पहले हिमेशवा का एगो सिनेमा आया था रेडियो। शहर में नया नया मल्टीप्लेक्स खुला था और हम भी नया नया लड़की पटाये थे। पहुँच गए फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो सिनेमा देखने की भीड़ कम होगा त कोना वाला सीट ले लेंगे। हम त प्लान बना के गए थे और अपनी गर्लफ्रेंड से झूठ बोल दिये थे की बहुत सुपरहिट सिनेमा है। साला ऐसा बेइज्जती कराया हिमेश भाई की आजतक शरम आता है। टिकिट काटने वाला लौंडा बोलता है की दो आदमी के लिए शो नहीं चलाएँगे। अब हम परेशान, कहे की अब गर्लफ्रेंड के साथ सास ससुर भी ले आयें? साला बोलता है तब भी नहीं चलाएँगे कम से कम गर्लफ्रेंड का मोहल्ला लेके आईये तब शो चलेगा। बहुत नाटक हो गया था भईया उस दिनवा। तो वही डरे डरे हम अकेले ही गए इस बार। लेकिन इस बार बहुत भीड़ था। हम सकपकाए।

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ME : हाँ सहिए कह रहे हो हम भी हाल के बाहर देखे बहुत भीड़ था भाई। कैसे इतना भीड़ खिच लिए हिमेश भाई?

SONU : अरे रुकिए न अभी आप सब भीड़ का सच बताते हैं आपको। हम लोग बैठ गए सिनेमा देखने। शुरू हुआ आऊर एक मिनट में जैसे ही गाना चालू हुआ “ओ हुज़ूर तेरा तेरा तेरा सुरूर” हा हा हा हा!!!!!! पब्लिक जो गाली बकना चालू किया क्या बताएं। पगला गया था सब। फुल्ल गला फाड़ के गरिया रहा था सब। तब समझ में आया की भीड़ काहे है। सब फ्रास्ट्रेट लोग था भईया जिसको गाली बकने के लिए जगह चाहिए था। बिना सोचे समझे गाली बके जा रहा था सब। फिर जानते हैं थोड़ा देर में ठंडा गया सब चुप हो गया शांति एकदम। फिर जैसे ही हिमेशवा गाया “पूछो ना पूछो ना, पूछो ना पूछो ना, पूछो ना सनम” हा हा हा हा हा!!!! अरे लोग और पगला गया। दे माँ बहन चालू कर दिया जबर्दस्त टाइप से। सब पब्लिक साला वहाँ गया था, आजकल चला है ना स्ट्रैस थेरेपी, उसी के लिए गया था।

ME : और सिनेमा में था क्या ये तो बताओ भाई?

SONU : अरे पता है आपको? सस्पेन्स सिनेमा था। हाहाहाहाहा!!!! घंटा किसी को मतलब था सस्पेन्स से। हिमेशवा खाली नया नया कपड़ा और नया नया पोज मार रहा था डाइलोगवा भी नहीं बोला है। कपड़ा उतार के लड़ाई भी किया है। देख के लगता है सलमानवा आम खा के गुठली रोड पर फेक दिया है।

(हाहाहाहा हम पेट पकड़ के हँसे जा रहे थे। सोनू भाई का ओब्जर्वेसन कमाल का है भाई। मानना पड़ेगा गुरु।सोनू भाई चालू थे।)

भईया नसीरुद्दीन शाह आया तो फिल्मवा थोड़ा शांत हुआ। लोग गाली बकना बंद कर दिया था। तब्बे अचानक हिमेशवा का नौटंकी फिर चालू हो गया “अस्सलाम वालेकुम वालेकुम अस्सलाम” सुनते फिर पब्लिक पगलाया और गाली बकना चालू कर दिया। मेरे बगलवा में एगो स्कूल का लौंडा बैठा था ऊ साला ज़ोर ज़ोर से बक रहा था स्वीटीया के बाप तुम्हारी @#$%&&*@#$%^&*@#$%^&*()।

हमको लगा हम कुछ मिस कर दिये का?  इस नाम का तो कोई है नहीं सिनेमा में? हम पूछे उससे ई स्वीटिया का बाप कौन है रे?

बोलता है स्वीटिया का बाप @#$%&*@#$%&* है। हम सोचे रहने दो भाई इसको, कोई फाइदा नहीं। लेकिन हमसे भी रहा नहीं गया। हम फिर पूछ दिये, “अच्छा यही बता दो स्वीटिया कौन है।“

ऊ ससुर और ज़ोर से चिल्लाया स्वीटिया @#$%&*())(*&%$#@ है। अब हम समझ गए ई कोई प्रेम प्रसंग का मामला है इस लिए उसको उसके जज़्बात के साथ छोड़ दिये और सिनेमा पे ध्यान लगाए।

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भईया जानते हैं गाली पर गाली पड़े जा रहा था लेकिन हिमेश भाई भी मान नहीं रहे थे। पब्लिक जब जब शांत हो कुछ ऐसा करते थे की फिर सब गाली बकने लग जाता। इस बार का किए की डाइलॉग मार दिये, “आई एम एन अंडरकवर असासिन” उसके बाद तो जो हंसी छूटा हॉल में क्या बताएं। गिर गिर के हंसा सब। हमारे बगल वाला लौंडवा अबकी राहुल गांधी को गाली बकने लगा। हम चकरा के पूछे की अब ई का नौटंकी है उसको काहे गाली बक रहा है? सिनेमा से उसका का लेना देना। त कहता है की गाली बकने का जब मन करता है उसी को गाली बकते हैं। कोई नहीं मिलता तब भी उसी को गाली बकते हैं। हम हाथ जोड़ लिए भाई।

इसका मतलब मिला जुला के बहुत खराब फिल्म है? हमने पूछा॰

ना ऐसा मत कहिए गाना सब एक से एक बनाया है। बस अकटिंगवा ऐसे करता है जैसे हमारे बाप पर एहसान कर रहा हो। दु गो आऊर महानुभाव हैं दु गो काहे तीन गो। शेखर कपूरवा अपने सिनेमा के लिए पईसा जुगाड़ रहा है। आ कबीर बेदी का त नया नया शादी हुआ है त खर्चा बढ़ गया होगा समझ सकते हैं। नसीरुद्दीन शाह का भईया सब माफ है कुछों करे। मिला जुला के ठिक्के है। पैसा बड़ी खर्चा किया है ससुर। सुने हैं की डॉक्टर लोग भेज रहा है अपना मरीज सब को खूब जी खोल के फुल्ल डॉल्बी डिजिटल साउंड में गाली बक के स्ट्रैस कम करने को। बढ़िया कमा लेगा हिमेश भाई सबसे टाइ अप कर ले त।

सोनू भाई की इतनी बेहतरीन समीक्षा सुनने के बाद अब पता नहीं अगली फिल्म हम कौन सी देखें। डरा दिये हैं भाई हमको।

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